NSIC Consortia and Tender Marketing Plan 2025: MSMEs के लिए समृद्धि का रास्ता

भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु और उद्योग (MSME) क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई योजनाओं को लॉन्च किया है। NSIC कंसोर्टिया और टेंडर मार्केटिंग स्कीम 2025 एक मील का पत्थर कदम है। इस योजना का उद्देश्य MSMEs को सरकारी और निजी क्षेत्रों में अनुबंधों के लिए बोली लगाने में मदद करना है, ताकि वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें और नए अवसरों का लाभ उठा सकें।

योजना का उद्देश्य:

MSMEs को सरकारी और निजी क्षेत्रों के साथ अनुबंधों में भाग लेने के लिए सक्षम बनाना, NSIC कंसोर्टिया और टेंडर मार्केटिंग योजना छोटे उद्यमों को एक स्थान पर क्लस्टर करने का प्रयास करती है। इस योजना के तहत, नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) छोटे उद्योगों के कंसोर्टिया का गठन करता है ताकि वे सामूहिक रूप से और तुलनात्मक रूप से आसानी से टेंडर के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकें। इस प्रकार, छोटे उद्योगों को बड़े परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर मिलता है, जो उनके व्यवसाय के विकास का परिणाम है।

योजना का एक और महत्वपूर्ण लक्ष्य छोटे उद्यमों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना है, जिससे उन्हें टेंडर दस्तावेजों और भागीदारी मानदंडों और अन्य संबंधित तकनीकी जानकारी को समझने में मदद मिल सके।

योजना के लाभ:

  • संसाधनों का एकत्रित प्रयोग: कंसोर्टिया के माध्यम से छोटे उद्योगों के समूह एकत्रित रूप से अधिक धनराशि वाली निविदाओं में भाग ले सकते हैं जिससे वह अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें।
  • निविदा प्रक्रिया में सहायकता: इस अंतर्गत उद्योगों को निविदा तथा उससे संबंधित दस्तावेजों की तैयारी तथा निविदा अनुबंधों की समझदारी में सहायकता दी जाती है। इससे उन्हें भाग लेने के योग्य तैयार किया जाता है।
  • नवीनता में बढ़ावा: छोटे उद्योग कंसोर्टिया में सम्मिलित होने के बाद सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में उपलब्ध बड़े अनुबंधों के अवसरों का लाभ उठा सकते हैं, जिससे वे अपने व्यापार का विस्तार कर सकें।
  • वित्तीय मदत: NSIC कंसोर्टिया के माध्यम से छोटे उद्योगों को बड़ी आर्थिक मदत और अन्य सहायता प्राप्त होती है, जो उनके व्यापार को प्रगति करने में सहायक होती है।
  • प्रतिस्पर्धा का माहौल: इस योजना के माध्यम से छोटे उद्योग अपने उत्पादों और सेवाओं पर निर्बंध हटाकर बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, जिसके अंतर्गत वे अपने व्यापार का विस्तार करते हैं।
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योग्यता:

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग: इस योजना के लाभार्थियों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (SMEs) शामिल होंगे।
  • भारतीय नागरिक केवल: इस योजना के तहत केवल भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं।
  • पंजीकरण: उद्योगों को NSIC के साथ पंजीकरण कराना होगा। इसके बिना, वे संघ के हिस्से के रूप में पंजीकरण नहीं करा सकते।
  • प्रोफ़ाइल और प्रमाणपत्र: एक आवेदक को अपनी कंपनियों के प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा, साथ ही कंपनी के गुणवत्ता मानक और वित्तीय स्थिति को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज भी शामिल करने होंगे।

प्रस्ताव प्रक्रिया:

  • कैसे करते हैं प्रारूप के लिए अनुरोध: हर नियुक्त उद्योग को NSIC की वेबसाइट पर जाकर प्रारूप ऑनलाइन भरना पड़ता है।
  • उद्योगों के दस्तावेज: प्रारूप भरे समय उद्योगों को उनकी कॉन्ट्रैक्ट और GST रजिस्ट्रेशन अकाउंट नंबर आदि, जिन्हें उनकी कंपनी के डिप्लोमा और डॉक्टर की जरूरत है, उन्हें अपलोड करना होता है।
  • उद्योग क्षेत्र के प्रधक्षव: कंसोर्टियम्स को एक प्रकार से प्रारूप अलग करके, उनसे व्यावसायी उद्योग अब वृद्धी कर सकते हैं।
  • समर्थक अच्छे नोड: दस्तावेज की प्रशासनिक कार्रवाई और नया उद्योग अलग ब्लूपाती से उद्योगों को चेतावनी देनी होती है।

कंसोर्टिया और निविदा विपणन की प्रक्रिया:

  • एक समूह के रूप में छोटे उद्योगों को जोड़ने का कार्य NSIC करती है जो मिलकर बड़े निविदा अवसरों में भाग ले सकें।
  • सभी उद्योगों को जिम्मेदारी साझा करनी होती है कंसोर्टिया में भाग लेने हेतु ताकि वह परिस्थितियाँ और शर्तों के अनुबंधों का पालन कर सके।
  • एक बार निविदा प्राप्त हो जाने पर कंसोर्टिया के सदस्यों प्रस्तावित किन्तु अनियोजित कार्य संधि के तहत क्रियान्वित करने लगते हैं।
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इस कंसोर्टिया और निविदा विपणन योजना 2025 के माध्यम से एनएसआईसी द्वारा छोटे उद्योगों को न केवल प्रस्तावित साधनों के दुरुपयोग पर नियंत्रण करने का उपाय उपलब्ध करना है बल्कि उन्हें स्थायी रूप से बड़े व्यापार अवसरों तक पहुँच प्रदान करने का प्रयास करना है। इस योजना से छोटे उद्योगों को संसाधन केंद्रों के आसपास सामूहिक रणनीति और उनकी योजना के क्रियान्वयन को सरल करने के लिए मार्गदर्शन मिल रहा है।

 

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