दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के तहत प्रशिक्षण और रोजगार अवसर

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो ग्रामीण युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित करती है। इसे प्रधानमन्त्री रोजगार योजना के तहत 2014 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले बेरोजगार युवाओं को उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ना एवं उनके कौशल को खुँने की मदद से सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार करना। इसे 2025 में प्रभावी रूप से लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्राथमिकी उद्देश्य:

  • ग्रामीण युवा के लिए कौशल प्रशिक्षण: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि वे नौकरी के योग्य बन सकें।
  • स्व-रोजगार के अवसर: इस योजना के तहत, न केवल रोजगार प्रदान किया जाता है, बल्कि युवाओं को अपने खुद के व्यवसाय शुरू करने के लिए स्व-रोजगार के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को सशक्त बनाना है ताकि वे अपनी और अपने परिवारों की जीवन स्तर को सुधार सकें।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए समान अवसर: यह योजना कौशल विकास के मामले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के अंतर को कम करने का लक्ष्य रखती है ताकि सभी को समान रोजगार के अवसर मिल सकें।
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योजना की प्रमुख विशेषताएँ:

  • कौशल प्रशिक्षण: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के तहत चयनित युवाओं को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। ये प्रशिक्षण क्षेत्र के मुताबिक होते हैं जैसे- स्वास्थ्य सेवाएँ, निर्माण, आईटी, पर्यटन, खुदरा, कृषि,以及与建造相关的工作等。
  • प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण केन्द्र: इस योजना के तहत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के अंत में प्रशिक्षित युवाओं को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है, जो उनके रोजगार प्राप्त करने में सहायक होते हैं।
  • वित्तीय सहायता: इस योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाले उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत रोजगार के अवसर भी मिलते हैं।
  • केंद्र और राज्य स्तर पर कार्यान्वयन: योजना को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लागू करती हैं। राज्य सरकारें स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के हिस bissi गużरते हैं और उनका कार्यान्वयन करती हैं।
  • समर्थन और मार्गदर्शन: योजना के तहत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के लिए मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही, विभिन्न उद्योगों और कंपनियों के साथ साझेदारी की जाती है, ताकि प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी मिल सके।

योजना के लाभ:

  • रोजगार के अवसर: इस योजना से युवा वर्ग को रोजगार मिलने से उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हेतू सहारा मिलता है।
  • स्वरोजगार का अवसर: प्रशिक्षण लेने के पश्चात युवा जाति व्यवसाय करने से स्वरोजगार जैसे दृष्टिकोणों को लेना आसान होता है, जिससे ग्रामीण हिस्सों में रोजगार तैयार करने की क्षमता बढ़ती है।
  • कौशल में वृद्धि: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना युवाओं को उन्नत कौशल से प्रशिक्षित करती है, इसलिए उनके उत्पादकता और दक्षता में इज़ाफ़ा होता है।
  • आर्थिक विकास में योगदान: इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलने से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास के लिए नए रास्ते खोलता है।
  • महिलाओं के लिए सशक्तिकरण: यह योजना महिलाओं को भी समान साधन उपलब्ध करवाती है जिससे वह खुद को आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम हो जाती हैं।
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जो स्कीम के लिए योग्य हैं:

  • किसी स्कीम के लिए आवेदक की अधिकतम उम्र 35 और न्यूनतम 15 वर्ष होनी चाहिए।
  • कैंडिडेट स्कीम के लिए किसी गाँव से जुड़ा होना चाहिए।
  • कक्षागत शिक्षा बुनियादी योग्यता कक्षा आठ पास हैं। कुछ विशेष पाठ्यक्रमों के लिए उच्च शिक्षा की आवश्यकता भी हो सकती है।
  • आर्थिक पृष्ठभूमि निर्दिष्ट प्राथमिकता सीमित क्षेत्र ऐसे स्कीमों में विशेषता रखती है, जैसे कि एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएँ व अन्य।

इन योजनाओं से भारतीय सरकार दक्षता प्रदान करने के उद्देश्य से ग्रामीण स्कूली उम्र के लड़कों और लड़कियों के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना 2025 उन्हें नौकरी देने की ही नहीं, उन्हें अपने छोटे मोटे कार्य करने के लिए सक्षम बनाना भी है। इससे हम ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को और तेज कर पाएंगे, साथ ही देश की विकास में भी योगदान कर पाएंगे।

 

 

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